Thursday, September 3, 2009

तुम्हारे बाद .........


रिवाजें निभाने का वक़्त आ गया है

तुम्हे भूल जाने का वक्त आ गया है ।


तेरी बदली नजरों से आहत है फ़िर दिल

कि फ़िर मुस्कुराने का वक्त आ गया है ।


शहर भर में फैलीं है अपनी कहानी

अब नजरें बचाने का वक्त आ गया है ।


मैं घर बार भूला था तेरे फिकर में

कि अब लौट आने का वक्त आ गया है ।


तेरा जाना तय था,सो ये ही हुआ भी

बहल ख़ुद ही जाने का वक्त आ गया है ।


वही बर्क नजरें और माह ऐ सितम्बर

कि फ़िर जख्म खाने का वक्त आ गया है .

5 comments:

pankaj said...

bahut umda

Anonymous said...

tera jana tai tha so ye hi hua bhi
bahal khud hi jane ka waqt aa gya hai..

wah wah.
likhte rahiye .
akash tripathi

Mohan said...

sahar bhar me faili hai apni kahani
najren bachane ka waqt aa gaya hai.

pure feeling ,nothing else...

likhte rahen achha hai.

Nituja Prakash said...

though the words have been written by u but it is the sayings of countless souls. had i had the sense and idea of composing ,i would have potrated my present in these words.

Nituja Prakash

Manish Chandra Gandhi said...

TASALLI THI ROSHANI KI MUJHE JIS CHIRAG SE ARMAN MERE JAL GAYE USI CHIRAG SE

Post a Comment