Thursday, October 1, 2009

अनमना सा कुछ

"तुम्हारी भूलने की आदत कब जायेगी ? "
तुम्हारे हथेली पे तुम्हारे कान के बूंदों को रखते हुए मैंने कहा था ।
"sorry this is the last time" तुमने कहा था .
मगर कहाँ !

तुमने बूंदों को सहेजा और मुझे भूल गई

5 comments:

महामंत्री - तस्लीम said...

बहुत मासूम सी शिकायत है।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

अभिषेक ओझा said...

ओह !

शरद कोकास said...

यह तो रोज़ की बात है ..

MUFLIS said...

itne km alfaaz meiN
itnaa badaa aur an-kahaa afsaana
keh daala aapne
jo chhipaa hai issmei
wo bhi mehsoos kiya ja sakta hai

precisely splendid....

---MUFLIS---

kabir khan said...

bhai aap yun hi likhte raho, Mashallah.

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