Monday, August 31, 2009

love......... opium of life


मुझसे मत पूछ आजकल की ख़बर
मैं तो माज़ी में जिया करता हूँ ।



जब तुम्हे भूल ही नही सकता
क्यूँ ये कोशिश ही किया करता हूँ ।



एक वो रात और लब ए शीरीं
अब भी वो जाम पिया करता हूँ ।



तज़किरा जब हुआ क़यामत का
मैं तेरा नाम लिया करता हूँ .



क्यूँ गया था मैं तेरी गलियों में
ख़ुद को ही दोष दिया करता हूँ .



आप ही जख्म हरे करता हूँ
आप ही जख्म सिया करता हूँ .



माज़ी-past


लब ए शीरीं - sweetness of lips
तज़किरा- mention, जिक्र

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