Tuesday, April 13, 2010

आदतन लिखता हूँ

न पूछ कैसी वजह ए कुल्फत है

तुमको रोना तो मेरी आदत है

"भूल जाओ कही सुनी बातें "

क्या गज़ब आप की नसीहत है

मत हो हैरान की मैं नहीं सोता

निस्फ़ रातों मे तेरी लज्जत है

उसको देखे से ऐसे लगता है

अपनी जैसी ही उसकी हालत है

"सत्य" की बात गर करे कोई

मान लेना की जेहनी ग़ुरबत है

वजह ए कुल्फत- दुःख का कारण

निस्फ़-आधी

जेहनी ग़ुरबत- दिमाग रहित

7 comments:

Suman said...

nice

अशोक कुमार पाण्डेय said...

अच्छी ग़ज़ल है भाई…

हरकीरत ' हीर' said...

न पूछ कैसी वजह ए कुल्फत है

तुमको रोना तो मेरी आदत है

क्यों ....??
सत्य जी भाव स्पष्ट नहीं हैं ....और प्रयास करें ...!!

Satya.... a vagrant said...

harkirat jee mere kahne ka bhav yeh tha ki " meri pareshani ka karan mat poocho.. kyunki tumhari judayi ko le ke shikwa karna to meri aadat ho chuki hai"
lekin haan aagar yeh spast nahi hai to main ise badalne ki koshish karunga .
sujhav ke liye dhanywad.
satya

दिगम्बर नासवा said...

"भूल जाओ कही सुनी बातें "
क्या गज़ब आप की नसीहत है

ऐसी नसीयतें देना तो हसीनाओं की आदत है .... अच्छी ग़ज़ल है ... लाजवाब शेर साथ ...

adhura swapn said...

उसको देखे से ऐसे लगता है

अपनी जैसी ही उसकी हालत है

isi mugalte main jinda hoon aajtak...achi poetry hai bhaiya...thoda aur simple chahiye kyunki aajkal gehrai ko samajhne wale kam hi hai...

आशीष/ ASHISH said...

"भूल जाओ कही सुनी बातें "
क्या गज़ब आप की नसीहत है
Kehna jitna aasan hai, nibhana utna hi mushkil!
Umda!

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