Tuesday, October 19, 2010

न जुनूँ रहा ...न परी रही




देखना तुम्हारी हथेलियों कों,

और बताना झूठे भविष्य ।


सताना तुम्हे और कहना,


कि मरोगी तुम छोटी उम्र मे ही ।


कहना तुम्हारा कि

"जानती हूँ"।


बस ये बता दो कैसे?


चूमना उंगलियाँ और कहना मेरा

कि हठात योग है


किसी फसाद में


विश्वासघात से या फिर


बिना किसी कारण ही।


हंसना तुम्हारा और कहना कि

"फसाद मे मरना


अवसाद मे मरने से


कहीं बेहतर है।"


" और श्वास का टूटना


विश्वास के टूटने से कहीँ अच्छा"।


फिर रुआंसा होना तुम्हारा


और कहना


"मैं तुम्हारे साथ बूढी होना चाहती थी"।







सबकुछ खत्म नहीं हुआ प्रिय...........


बस तुम बिन बूढा होना,

विश्वासघात सा लगता है।




(अवनीश को धन्यवाद...जो मुझे याद दिलाते हैँ कि, लिखना, जिवीत रहने की अनुभुति है)

8 comments:

adhura swapn said...

"swas ka tutna vishwas ke tutne se kahi acha hai....bahut badiya bhaiya.....pls keep writing on regular basis.....good luck

सागर said...

सत्य, यह तो तुम्हें खुद पता होना चाहिए था, लेकिन कोई अगर कान पकड़ के भी सही रास्ते ले आये तो भी ठीक है... तुम खुद पढना कुछ महीने बाद... तुमने बहुत अच्छा लिखा है यार. ... पर्सनल अनुभव से कह सकता हूँ की फसाद में मरना अवसाद में मरने सचमुच कहीं अच्छा है. कितना तारीफ़ करूँ इतने सुन्दर वाक्य के लिए की चूमना उंगलियाँ और हटात योग ... वाह ! स्वश का टूटना विश्वास टूटने से बेहतर और अंत में तुम्हारे साथ बूढी होना...

यार तुम लिखा करो... प्लीज़. फिर किसी दिन किसी पोस्ट में मेरा भी शुक्रिया अदा करना :)

p guru said...

आपका आभार व्यक्त करने के लिए मेरे पास शब्दों की कमी पड़ रही है...
और बहुत हद्द तक आपकी कवितायों को पढ़ भर लेने से ही मुझे जिन्दा होने का एहसास होता है ...!!
दुसरे सब्दों में ,"आपके द्वारा लिखी हुई हर एक कविता से मेरे जैसा हर आम आदमी जुड़ा हुआ महसूस करता है!" जो की अपने आप में सर्वश्रेष्ठ है.
व्यक्तिगत रूप से मैं आपका आभारी हूँ....एक अनूठी रचना 'ना जुनूं रहा ...न परी रही ' के लिए!
'फसाद में मरना अवसाद में मरने से अच्छा है' और 'स्वश का टूटना विश्वास टूटने से बेहतर '...............
वास्तव में सागर साब ने मेरे सारे शब्द छीन लियें हैं!!वाकई आपने गजब का लिखा है.

इसके अलावा ..,
'सब कुछ ख़त्म नहीं हुआ प्रिये ..
बस तुम बिन बूढ़ा होना
विस्वासघात सा लगता है ',
ने दिल की गहराइयों को छुआ है..
एक उत्कृष्ट रचना................

Mohan said...

sataya saheb-

aapne dil ki kuch purani yaado ko jhanjhor diya hai. Pls keep the same stuff forever.

Best for your future.

Mohan.

anjali said...

literally dear, you have taken my heart away!
the words you used here, are not so much fmiliar to me, but i will consult dictionary to understand the meaning of this...
You rock !

Satya.... a vagrant said...

HEY THANKS ANJALI AND TO ALL OF U .
SATYA .......A VAGRANT

kabir khan said...

uncle ji

kabir khan said...

uncle aapki kavita me ek ajb si ruhaniyat hai jo dimag se hoke jigar tak utar jati hai,aor fir se dimag ko sochne pe mazbur kardeti hai,Kram ho Rab ka aap pe aor khyalo pr.

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